Rare DurgA-LakshmI-Saraswati AshTottaram

 

(As found in R. Visvanatha Sastri’s note-books  by V. Krishnamurthy)

Note: This ashtottara is rare in the sense I have not seen it anywhere in print or in the knowledge of anybody whom I know. It cannot be an original composition of my father since he has not mentioned it so. I have seen him use it in his puja and I have myself been using it ever since.

ओं वाग्-देव्यै नमः

ओं शारदायै नमः

ओं मायायै नमः

ओं नादरूपिण्यै नमः

ओं यशस्विन्यै नमः

ओं स्वाधीन-वल्लभायै नमः

ओं हाहाहूहू-मुख-स्तुत्यायै नमः

ओं सर्व-विद्या-प्रसादिन्यै नमः

ओं रञ्जिन्यै नमः

ओं स्वस्तिकासनायै नमः      10

 

ओं अज्ञान-तिमिर-द्वान्त-चन्द्रिकायै नमः

ओं अति-विद्या-प्रदायिन्यै नमः

ओं कम्बुकण्ट्यै नमः

ओं वीणा-गान-प्रियायै नमः

ओं शरणागत-वत्सलायै नमः

ओं श्री- सरस्वत्यै नमः

ओं नील-कुन्तलायै नमः

ओं वाण्यै नमः

ओं सर्व-पूज्यायै नमः

ओं कृत-कृत्यायै नमः       20

 

ओं तत्त्व-मय्यै नमः

ओं नारदादि-मुनि-स्तुतायै नमः

ओं राकेन्दु-वदनायै नमः

ओं यन्त्रात्मिकायै नमः

ओं नळिन-हस्तायै नमः

ओं प्रिय-वादिन्यै नमः

ओं जिह्वा-सिद्ध्यै नमः 

ओं हम्स-वाहिन्यै नमः

ओं भक्त-मनोहरायै नमः

ओं दुर्गायै नमः                       30

 

ओं कल्याण्यै नमः

ओं चतुर्मुख-प्रियायै नमः

ओं ब्राह्म्यै नमः

ओं भारत्यै नमः

ओं अक्षरात्मिकायै नमः

ओं अज्ञान-ध्वान्त-दीपिकायै नमः

ओं बाल-रूपिण्यै नमः

ओं देव्यै नमः

ओं लीला-शुक-प्रियायै नमः

ओं दुकूल-वसन-धारिण्यै नमः        40

 

ओं क्षीराब्दि-तनयायै नमः

ओं मत्त-मातङ्ग-गामिन्यै नमः

ओं वीणा-गान-विलोलुपायै नमः 

ओं पद्म-हस्तायै नमः

ओं रणत्-किङ्किणि-मेखलायै नमः

ओं त्रि-लोचनायै नमः

ओं अङ्कुशाक्ष-सूत्र-धारिण्यै नमः

ओं मुक्ता-हार-विभूषितायै नमः

ओं मुक्ता-मण्यङ्कित-चारु-नासायै नमः

ओं रत्न-वलय-भूषितायै नमः             50

 

ओं कोटि-सूर्य-प्रकाशिन्यै नमः

ओं विधि-मानस-हंसिकायै नमः

ओं साधु-रूपिण्यै नमः

ओं सर्व-शास्त्रार्थ-वादिन्यै नमः

ओं सहस्र-दळ-मध्यस्तायै नमः

ओं सर्वतो-मुख्यै नमः

ओं सर्व-चैतन्य-रूपिण्यै नमः

ओं सत्य-ज्ञान-प्रबोदिन्यै नमः

ओं विप्र-वाक्-स्वरूपिण्यै नमः

ओं वासवार्चितायै नमः             60

 

ओं वाङ्-मय्यै नमः

ओं शुभ्र-वस्त्रोत्तरीयायै नमः

ओं विरिञ्चि-पत्न्यै नमः

ओं तुषार-किरण-भायै नमः

ओं भावाभाव-विवर्जितायै नमः

ओं वदनाम्बुजैक-निलयायै नमः

ओं मुक्ति-रूपिण्यै नमः

ओं गजा-रूढायै नमः

ओं वेद-नुतायै नमः

ओं सर्व-लोक-सुपूजितायै नमः        70

 

ओं भाषा-रूपायै नमः

ओं भक्ति-दायिन्यै नमः

ओं मीन-लोचन्यै नमः

ओं सर्व-शक्ति-समन्वितायै नमः

ओं अति-मृदुळ-पदाम्बुजायै नमः

ओं विद्यादर्यै नमः

ओं जगन्मोहिन्यै नमः

ओं रमायै नमः

ओं हरि-प्रियायै नमः

ओं विमलायै नमः                 80

 

ओं नारायण्यै नमः

ओं मङ्गळ-प्रदायै नमः 

ओं अश्व-लक्ष्म्यै नमः

ओं धान्य-लक्ष्म्यै नमः

ओं राज्य-लक्ष्म्यै नमः

ओं गज-लक्ष्म्यै नमः

ओं मोक्ष-लक्ष्म्यै नमः

ओं संतान-लक्ष्म्यै नमः

ओं जय-लक्ष्म्यै नमः

ओं खड्ग-लक्ष्म्यै नमः             90

 

ओं कारुण्य-लक्ष्म्यै नमः

ओं सौम्य-लक्ष्म्यै नमः

ओं भद्र-काळ्यै नमः

ओं चण्डिकायै नमः

ओं शाम्भव्यै नमः

ओं सिम्ह-वाहिन्यै नमः

ओं त्रिणेत्रायै नमः

ओं सुभद्रायै नमः

ओं महिषासुर-मर्दिन्यै नमः

ओं अष्टैश्वर्य-प्रदायिन्यै नमः           100

 

ओं हिमवत्-पुत्रिकायै नमः

ओं महा-राज्यायै नमः

ओं त्रिपुर-सुन्दर्यै नमः

ओं पाशांकुश-धारिण्यै नमः

ओं श्वेत-पद्मासनायै नमः

ओं चांपेय-कुसुम-प्रियायै नमः

ओं वन-दुर्गायै नमः

ओं राज-राजेश्वर्यै नमः                                                    १०८

 ओं दुर्गा-लक्ष्मी-सरस्वत्यै नमः

ओं तत्-सत्

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